बहाना बनाना असफलता की निशानी!

बहाना बनाना उतना ही पुराना है जितना की मानव जाति। आज के समय में बहाना बनाना लोगों का शौक बन चुका है । बहाना  सफलता के रास्ते में सबसे घातक है। कुछ लोग बहाना बनाने को अपनी महानता समझते हैं और बहुत सम्मानित महसूस करते हैं। जैसे सबसे अच्छा बहाना है सबका मैं बहुत busy  हूं। कुछ लोग बहाने को अपने बच्चों की तरह पालते हैं और बहाना बनाना अपने रोजमर्रा के जीवन में भी अपना चुके हैं।
हम लोग बहाने क्यों  बनाते हैं?


लोग अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए बहानों का इस्तेमाल करते हैं बल्कि बहाने ही उनको असफल बनाते हैं यह उन्हें पता नहीं है या पता नहीं चलता है।  मैं बहुत बिजी था ,ऑफिस में बहुत काम होता है, काम का बहुत stress है ,मैं बाद में करता या करती हूं। मन में कई बार किसी चीज के प्रति डर होने से भी हम बहाने बनाते हैं। लोग बहाने इसलिए बनाते हैं क्योंकि वह अपने आराम  वाली जगह (comfort zone) से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। कुछ लोगों को काम करना पसंद नहीं होता तब भी वह लोग बहाने बनाते हैं  ।कुछ लोग मेहनत नहीं करना चाहते हैं तब भी वह बहाने बनाते हैं । सबसे  महत्वपूर्ण ,लोग इसलिए बहाने बनाते हैं क्योंकि उन्हें बहाने बनाने की आदत हो गई है। अगर हम ऐसे ही बहाने बनाते रहे तो हमें बहाने बनाने की आदत पड़ जाएगी। बहाने बनाने की आदत हमें हमेशा पीछे की ओर धकेल देगी । यह कभी हमें जीवन में सफल नहीं होने देती।
   बहानों के नुकसान
बहानों से जिसका सबसे ज्यादा नुकसान होता है वह आदमी खुद ही होता है जो बहाने बनाता है। लेकिन जब आदमी बहाने बनाता है तो उसको यह पता नहीं होता है कि इससे उसका ही नुकसान होगा। और वह इस चीज को नहीं समझ पाता है। एक पल तक उसे अच्छा लगता है कि उसके सिर के ऊपर से बला टली लेकिन उस एक बहाने का खामियाजा उसे जीवन भर भुगतना पड़ता है। जितना हम लोग बहाने बनाएंगे उतना ही हम अपने मन को उस काम से दूर ले जाएंगे। हम अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागेंगे ।जीवन में हम कोई भी सही निर्णय नहीं ले पाएंगे। हर चीज में हमें देर हो जाएगी और अंत में हम सोचेंगे कि हमारे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है । हमें काम ना करने की आदत हो जाएगी।
बहनों को अपने जीवन से कैसे दूर रखें?
बहनों को अपने जीवन से दूर रखने के लिए हमें सबसे पहले तो अपनी गलतियों को मानना होगा । अपनी असफलताओं को स्वीकार करना होगा। अपनी असफलताओं की जिम्मेदारी लेनी होगी, कि मेरी गलती थी ,मेरी लापरवाही की वजह से वह काम नहीं बना। अपनी असफलताओं के पीछे क्या कारण रहा यह सब जानना होगा और उन को सुधारना होगा इसके लिए खुद को बदलना होगा । हमें अपने प्रति कठोर होना पड़ेगा। अगर हम अपने प्रति कठोर नहीं हुए तो बाद में बहुत पछताना पड़ेगा। हमें अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित करना होगा कि हमें जीवन में क्या करना है। फिर उसके बाद उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें मेहनत करनी होगी और ऐसा कोई काम नहीं है  जिसको पूरे मन से किया जाए और सफलता ना मिले।
अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगी कि दुनिया में बहुत लोगों के ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने कठिन से कठिन परिस्थिति में भी मेहनत की और सफल हुए हैं । सफल होने के लिए परिस्थिति को नहीं बल्कि  मनोस्थिति को बदलना होगा । और अगर  मनुष्य ने अपनी मनोस्थिति को बदल लिया तो परिस्थिति को बदलने से कोई नहीं रोक पाएगा । 
॥  धन्यवाद॥  

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