“आजकल रिश्ते मतलबी क्यों हो गए है”

precaution c section

रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं। इन को बड़ा संभाल कर रखना होता है। लेकिन आजकल रिश्ते बहुत खोखले होते जा रहे हैं। रिश्तो में वह बात नहीं रही जो पहले के समय में होती थी। पहले के समय में संयुक्त परिवार होते थे। एक परिवार में 20-25 लोग एक साथ रहते थे। एक घर में 10 से 15 बच्चे होते थे। खाना एक ही रसोई घर में बनता था। सब मिलजुल कर एक घर में एक ही छत के नीचे रहते थे। देखा जाए तो रिश्ते शब्द अपने आप में ही पूरा नहीं है परंतु यह अपने आप में पूरी दुनिया को समा जाएगा।

खोखले रिश्ते”

आजकल रिश्ते बहुत खोखले हो गए हैं। कोई भी अपने रिश्तो को संभालना नहीं चाहता है। रिश्ता चाहे पति-पत्नी का हो , मां-बाप का हो , भाई-बहन का हो ,देवरानी जेठानी का हो या देवर भाभी का हो। सब रिश्तो को अंदर से  “EGO ” का दीमक लगा हुआ है। अपनी “EGO”के आगे कोई झुकना नहीं चाहता है। कोई किसी को ” SORRY ” नहीं बोलना चाहता है। एक रिश्ता भी ऐसा नहीं है कि वह परफेक्ट हो।

“रिश्तो का महत्व”

जब एक बच्चा इस दुनिया में पैदा होता है ,तो वह  रिश्तो में बंध जाता है। उसको रिश्ते उसके पैदा होने से पहले ही मिल जाते हैं। किसी का बेटा बन जाता है, किसी का पोता बन जाता है ,किसी का भाई बन जाता है , किसी का नाती और किसी का भतीजा बन जाता है। यह सब रिश्ते उसको उपहार में मिले होते हैं । इन सब रिश्तो को उसे बड़ा संभाल के और संजो के रखना पड़ता है। रिश्तो का महत्व वही जान सकता है जिसके पास कोई नहीं होता।  जो बच्चे अनाथ होते हैं उनसे पूछना रिश्तो का क्या महत्व है।

” मतलबी रिश्ते”

आजकल लोग बहुत मतलबी हो गए हैं। दोस्त ,दोस्ती अपने मतलब के लिए करते हैं। रिश्तेदार भी उन्हीं से रिश्ते निभाते हैं जिनके पास पैसा और दौलत होती है। हर कोई अपने मतलब के लिए एक दूसरे से बात करते हैं। मतलब खत्म रिश्ता खत्म। किसी को किसी से कुछ भी लेना देना नहीं है , आज के समय में। सब अपने अपने कामों में व्यस्त हैं। मतलब होगा तो रिश्ते याद आ जाते हैं। और जब  अपना काम हो गया तो पहचानने से भी इंकार कर देते हैं।

” नाजुक रिश्ते”

कुछ रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं। जैसे पति -पत्नी, मां-बच्चे का रिश्ता और माता-पिता का रिश्ता , सास और बहू का रिश्ता। सब रिश्ते विश्वास पर ही टिके होते हैं। अगर एक दूसरे पर विश्वास नहीं है तो रिश्ते का भी कोई मोल नहीं है।  पति और पत्नी को एक दूसरे पर विश्वास करना चाहिए और शक का कीड़ा एक हरे भरे रिश्ते को भी खा जाता है।अगर मां बाप अपने बच्चों को डांटते हैं  ,तो बच्चों को लगता है कि हमारे  मां-बाप तो बहुत  “STRICT “है । बच्चे मां-बाप से डरने लगते हैं ,चीजें छुपाने  लगते हैं और गलत कर देते हैं। इसलिए मां-बाप को भी अपने बच्चों को बड़े प्यार से हैंडल करना पड़ता है और  अगर बच्चे कुछ गलत कर दें तो उनको डांटना भी पड़ता है।  पेरेंट्स को हमेशा बच्चों का फ्रेंड बनकर रहना चाहिए,  उन्हें उन पर  विश्वास करना चाहिए  ।


आखरी में बस यही कहना चाहूंगी रिश्ता चाहे कोई भी हो पति-पत्नी का हो ,मां बाप का हो ,भाई बहन का हो, ननद भाभी का हो , देवर भाभी का हो, सब को दिल से निभाना चाहिए। और अगर जिस रिश्ते में कभी भी लड़ाई ना हो तो समझ लेना कि रिश्ता दिल से नहीं दिमाग से निभाया जा रहा है ।
॥धन्यवाद॥  

ReplyForward

Leave a Reply